चर्चा की सिलाई दुकान में लगी भीषण आग, काफी मशक्कत के बाद आग पर पाया जा सका काब।ू

चरचा के कपड़ा सिलाई दुकान में लगी भीषण आग, चरचा कोरिया छत्तीसगढ़ से प्रभात दास की रिपोर्ट, नगर पालिका शिवपुर चरचा के मुख्य मार्ग पर स्थित महुआ पेड़ के पास शुक्रवार देर रात एक कपड़ा सिलाई दुकान में अग्निकांड ने पूरे क्षेत्र में हड़कंप मचा दिया। अचानक लगी आग ने कुछ ही समय में विकराल रूप धारण कर लिया, कपड़ा सिलाई दुकान सहित चपेट मे और एक फोटो कॉपी की दुकान पूरी तरह जलकर खाक हो गईं। आग की लपटें इतनी तेज थीं कि पास में स्थित फल दुकान तक पहुंच गईं, जिससे वहां रखा सामान भी आंशिक रूप से जल गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार देर रात आंधी के दौरान अचानक आग भड़क उठी। तेज हवा के कारण आग ने तेजी से फैलते हुए दोनों दुकानों को अपनी चपेट में ले लिया। घटना के समय आसपास सन्नाटा होने के कारण आग पर तुरंत काबू नहीं पाया जा सका, जिससे नुकसान और बढ़ गया। सुबह जब टहलने निकले लोगों ने धुआं और आग की लपटें देखीं, तब जाकर घटना की जानकारी आसपास के दुकानदारों को दी गई। सूचना मिलते ही दुकानदार मौके पर पहुंचे और बाल्टी से पानी भर-भरकर आग बुझाने का प्रयास शुरू किया। सीमित संसाधनों के बावजूद स्थानीय लोगों ने घंटों की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर किसी तरह काबू पाया। आपात स्थिति में न तो कोई त्वरित सहायता मिली,लोगों का कहना है कि यदि समय पर फायर ब्रिगेड उपलब्ध होती, तो नुकसान को काफी हद तक रोका जा सकता था। आग बुझने के बाद नगर पालिका द्वारा पानी का टैंकर भेजा गया, जिसे लोगों ने केवल औपचारिकता और खानापूर्ति करार दिया। घटना की सूचना मिलते ही नगर पालिका उपाध्यक्ष राजेश सिंह मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। वहीं थाना प्रभारी उप निरीक्षक आनंद सोनी भी मौके पर पहुंचकर घटना की जांच में जुट गए। फिलहाल आग लगने के कारणों का स्पष्ट खुलासा नहीं हो पाया है, लेकिन प्रारंभिक अनुमान आंधी के दौरान शॉर्ट सर्किट या अन्य तकनीकी कारणों की ओर इशारा कर रहे हैं। इस अग्निकांड ने न केवल दुकानदारों को भारी आर्थिक नुकसान पहुंचाया है, बल्कि नगर पालिका की आपदा प्रबंधन व्यवस्था की पोल भी खोलकर रख दी है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द फायर ब्रिगेड को दुरुस्त किया जाए और भविष्य में ऐसी घटनाओं से निपटने के लिए ठोस इंतजाम किए जाएं, ताकि किसी बड़े हादसे से समय रहते बचा जा सके। इस भीषण अग्निकांड के बाद प्रभावित दुकानदारों का रो-रोकर बुरा हाल है। उनकी वर्षों की मेहनत और रोजी-रोटी का साधन कुछ ही घंटों में जलकर राख हो गया। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार दोनों दुकानों में रखा सिलाई मशीन, कपड़े, कागजात, फोटो कॉपी मशीन सहित अन्य जरूरी सामान पूरी तरह नष्ट हो गया है, जिससे लाखों रुपए के नुकसान का अनुमान लगाया जा रहा है। स्थानीय व्यापारियों ने प्रशासन से तत्काल आर्थिक सहायता और मुआवजे की मांग की है। उनका कहना है कि छोटे व्यवसायी पहले ही आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहे हैं, ऐसे में इस तरह की घटना ने उनकी कमर तोड़ दी है। यदि जल्द सहायता नहीं मिली तो उनके लिए दोबारा व्यवसाय शुरू करना बेहद मुश्किल हो जाएगा। घटना के बाद क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी चिंता बढ़ गई है। लोगों का कहना है कि मुख्य मार्ग पर होने के बावजूद रात के समय न तो पर्याप्त रोशनी रहती है और न ही किसी प्रकार की आपातकालीन सुविधा उपलब्ध है। इससे भविष्य में भी इस तरह की घटनाओं की आशंका बनी रहती है। वहीं, पुलिस ने मौके पर पहुंचकर आसपास के लोगों से पूछताछ शुरू कर दी है और आग लगने के वास्तविक कारणों की जांच की जा रही है। विद्युत विभाग की टीम से भी जांच कराए जाने की बात कही जा रही है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि कहीं शॉर्ट सर्किट या बिजली से जुड़ी कोई लापरवाही तो इस घटना की वजह नहीं बनी। नगर पालिका प्रशासन पर लापरवाही के आरोपों के बीच अब जिम्मेदार अधिकारी भी सफाई देने की तैयारी में हैं। सूत्रों के अनुसार जल्द ही फायर ब्रिगेड को सुधारने और आपातकालीन व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने का आश्वासन दिया जा सकता है। इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि छोटे शहरों में आपदा प्रबंधन की तैयारियां अभी भी बेहद कमजोर हैं। यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो भविष्य में ऐसे हादसे और भी बड़े नुकसान का कारण बन सकते हैं।फिलहाल पूरे क्षेत्र में इस घटना को लेकर चर्चा का माहौल है और लोग प्रशासन से ठोस कार्रवाई की उम्मीद कर रहे हैं।

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